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Organic-farming-certification-in-India /जैविक कृषि प्रमाणीकरण

 जैविक कृषि प्रमाणीकरण जैविक कृषि प्रमाणीकरण Organic farming certification एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है अतः प्रमाणीकरण कार्यक्रम में अंतर्गत उसी उत्पादन प्रक्रिया को प्रमाणीकृत करना चाहिए जो लंबी अवधि के लिए की जा ही हो। बदली गई भूमि एवं पशु बार-बार साधारण प्रबन्धन या जैविक कृषि प्रबन्धन की बीच नहीं आने चाहिए।  मध्य प्रदेश जैविक कृषि प्रमाणीकरण विश्व के कई देशों में जैविक खेती उत्पाद की मांग कुछ समय पूर्व प्रबल हुई है | फलस्वरूप विश्व के कई देशों के साथ भारत में भी जैविक खेती की जाना प्रारंभ हुई है | मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में गत 2 – 3 वर्षों में कृषकों द्वारा जैविक खेती को व्यापक रूप से अपनाया है | जैविक खेती से प्राप्त उत्पाद को बाजार में एक अलग पहचान मिल सके इस उदेश्य से राष्ट्रीय एवं अंतर राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास प्रारंभ हुए है  | पंजीयन की प्रक्रिया जैविक उत्पाद को इस स्तर पर बहुत जटिल प्रक्रिया अपनाकर एक पहचान दी जाती है | साथ ही यह प्रक्रिया कठिन एवं खर्चीला है |हमारे देश के किसान इस प्रक्रिया से गुजरकर अपने जैविक उत्पाद का पंजीयन करा सकें | यह अधिकांश किसानो...

10-Best-organic-food-brands-in-India

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10-Best-organic-food-brands-in-India Branded organic food companies' Information in this blog post  Top 10 organic companies in India In this article, information will be given about the 10 Best organic food brands in India so that consumers and businessmen can get information about the company. This article is being written to take advantage of this to save your health and money and also get pure organic food. To get food, in this article information is given about the production and production of companies. Take advantage of this information.  10 Best organic food brands in India  01    24 Mantra organic       02 -organic India       03 organic tattva       04 -Phalada is Pure and sure      05 Natureland organic      06  Nutriorg      07   Adya organic      08  PRAKRTIK STVA      09  win green farms     ...

Brinjal-cultivation-in-Hindi/began-ki-kheti

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 Brinjal-cultivation-in-Hindi बैगन की खेती  बैगन की ऐसी सब्जी है इसकी खेती 12 महीने मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ गुजरात राजस्थान काफी इलाकों पर 12 महीने बैगन की खेती की जाती ब्रिंजल अगस्त का जो महीने रहता है यह काफी व्यस्त माना जाता है और सर्दियों के लिए आपको सितंबर अंत से लेकर के अक्टूबर के बीच में आपको प्लांटेशन कर देना चाहिए और गर्मियों के लिए बैगन काफी लंबे समय तक चलने वाली क्रॉप है  बैगन की खेती में भूमि  दोस्तों भूमि मिट्टी किस प्रकार की मिट्टी होनी चाहिए तो 2 मिट भूमि पर भी अच्छा उत्पादन है और हल्की भूमि रेतीली 2 मिट भूमि है तो दोनों प्रकार की सॉइल पर पीएच वैल्यू है दोस्तों वह 7:30 से ऊपर की नहीं होनी चाहिए अधिक से अधिक पीएच मान लीजिए यदि पीएच की वैल्यू 8 से अधिक अल्कलाइन सॉइल है तो फिर ऐसी कंडीशन पर आप 50 किलोग्राम जिप्सम खेत की तैयारी करते समय प्रयोग कर लेना और यदि पीएच वैल्यू 8 से अधिक है तो आपको पता है कि यूरिया खाद देने के बाद भी रिजल्ट नहीं आते हैं तो इसलिए दोस्तों थोड़ा सा पीएच का ध्यान दे देना और मिट्टी की जांच जरुर कर लेना  पता चल जाए...

Bottle-gourd-farming/lauki-ki-kheti

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 lauki ki kheti लौकी की खेती कई किसान एक साल में तीन-तीन लौकी की फसल ले लेते हैं और अच्छा मुनाफा भी कमाते हैं तो  क्योंकि लौकी को साल में तीन बार लगाया जा सकता है तो सबसे ज्यादा मुनाफा या उत्पादन लेना है तो वह सही समय कौन सा है और ज्यादा मुनाफा भी किसान भाइयों को लेकिन उसे टाइम जो है आपकी फसल का उत्पादन जून जुलाई की फसल की तुलना में काम रहता है   लौकी बोनी की विधियां  lauki ki kheti kaise kare अब बात करते हैं लौकी को लगाने का तरीका से लगाया जाता है एक तो पारंपरिक तरीका जिसमें जो बी है वह सड़क दिया जाता है या एक दीवार की तरह और तीसरा  मचान विधि से लौकी लगाई जाती है उसमें ज्यादा उत्पादन भी होता है और अच्छा भाव भी मिलता है अच्छा भाव भी लेना चाहते हैं तो मचान विधि का अपने खेत में लगाकर लोग लगा सकते हैं  1 एकड़ मचान विधि से लौकी लगाने में लगभग 35000 से ₹40000 का खर्च आता है और जो यह आगे बात करते हैं लौकी को लगाने में क्या सावधानियां बरतनी है तो सबसे पहले आप सीड ट्रीटमेंट जरूर करें ताकि किट वगैरा है आपके बीच को खराब ना करें नंबर दो पर पौधे से पौधे की दूरी है वह ड...

benefits-of-Urban-farming

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  benefits of Urban farming शहरी खेती क्या है Urban farming agriculture in Hindi शहरी खेती घनी आबादी केवल आबादी वाले क्षेत्र में भोजन की खेती या उत्पादन की प्रथम है इसमें छत पर एवं ब्रांडी में हम गार्डनिंग के नाम से जाना जाता है शहरी खेती को मुख्य रूप से बाजार में बेचने के लिए बढ़ती फसलों फलों सब्जियों एवं मां फसलों के आधार पर परिभाषित किया गया है निर्वाह खेती शहरी बागवानी यह विभिन्न तरीकों से अर्थव्यवस्था में लोगों की सामुदायिक मदद करती है शहरी बागवानी ताज उपज प्रदान करती है जो एक स्वस्थ जीवन शैली के साथ-साथ अन्य वस्तुओं का समर्थन करती है इसके अतिरिक्त यह आए उत्पादन और लघु व्यवसाय विस्तार को बढ़ावा देती है ताजा भोजन अधिक के फायदे बनाना  benefits of Urban farming  शहरी कृषि का प्रमुख लाभ है धीरे-धीरे यह लोगों की फैशन बन चुका है शहरी खेती महत्वपूर्ण क्यों है शहरी खेती   benefits of Urban farming  उन लोगों को महत्वपूर्ण है जो शहर छोड़ने एवं ग्रामीण भूखंड खरीदने में सक्षम नहीं है और इनका किसानी करने का शौक या जुनून है शहरी फॉर्म किसान बाजारों के माध्यम से...

muli-ki-kheti-jankari /radish-farming

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 परिचय कृषि क्षेत्र में मूली की जैविक खेती करके किस अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं इसकी खेती की जानकारी इस लेख में दी जा रही है muli ki kheti jankari मूली की खेती में जमीन की तैयारी बनी का समय खाद एवं उर्वरक की मात्रा खरपतवार नियंत्रण सिंचाई कटाई से संपूर्ण जानकारी दी जा रही है किसान भाई इस लेख का फायदा लेकर मूली की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं जमीन की तैयारी मूली की जैविक खेती में जमीन को पिलाओ द्वारा या तोता हाल द्वारा गहरी जुताई करके जमीन को समतल कर लेना चाहिए एवं इसकी बुवाई के लिए जमीन में महल पद्धति से बनी करना चाहिए बिजाई जैविक मूल्य की खेती के लिए बोनी के लिए सही समय बरसात एवं ठंड के दिनों में और गर्मियों में अप्रैल माह में इसकी बनी की जा सकती है muli ki kheti jankari अगस्त सितंबर में की जाने वाली बनी से अच्छा फायदा किसानों को मिलता है मूली की जैविक खेती के लिए मेड पद्धति से बीच की बिजाई करना चाहिए जिसमे बीज से बीच की दूरी 4 सेमी एवं महल से महल की दूरी ढाई फीट रखना चाहिए  सिंचाई मूली की खेती के लिए 7 से 10 दिन के भीतर स्प्रिक कलर द्वाचाई की जाना चाहिए हल्की सिंचाई करन...

zero-budget-natural-farming/prakritik-kheti

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  जीरो बजट प्राकृतिक खेती  जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग मूल रूप से महाराष्ट्र की एक किसान सुभाष पालेकर द्वारा विकसित रसायन मुक्त कृषि का एक रूप है यह विधि कृषि की पारंपरिक भारतीय प्रथाओं पर आधारित है इस zero budget natural farming खेती के जानकारों का कहना है कि यह खेती देसी गाय के गोबर और गोमूत्र पर आधारित है जीरो बजट प्राकृतिक खेती क्या है सुभाष पालेकर की जीरो बजट फार्मिंग प्राकृतिक खेती में कृषि लागत उर्वरक कीटनाशक और गहन सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती जिससे कृषि लागत में आश्चर्य जनक रूप से गिरावट आती है इसलिए zero budget natural farming इसे जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग का नाम दिया गया है इसके अंतर्गत घरेलू संसाधनों द्वारा विकसित प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें किसानों को किसी भी फसल को उगाने में कम खर्च आता है और कम लागत लगने के कारण उसे फसल का किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होता है जीरो बजट नेचुरल फार्मिंग का आधार है जीवामृत यह गाय के गोबर मूत्र और पत्तियों से तैयार कीटनाशक का मिक्सर है सुभाष पालिकारी कृषि वैज्ञानिक हैं और उन्होंने पारंपरिक भारतीय कृषि प्रथाओं को...

flax-seed-farming-in-India

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                                                   अलसी के फायदे                      अलसी   अलसी क्या है हिंदी में -   flax seed farming in India भारतवर्ष में अलसी की खेती के साथ की जाती है हिमाचल प्रदेश में भी 6000 फुट की जमीन तक अलसी बोई देश में जगह-जगह पाई जाती है अलसी के बीज के रंग रूप और आकार में अंतर सफेद, धूसर, धूसर में पाए जाते हैं इसके कई प्रकार के बीज प्राप्त होते हैं। अलसी के बारे में-   वैज्ञानिक नाम लिनम यूसिटेटिसियम लिनम यूसिटेटिसियम कुल नाम - लिनेसी लिनेसी अंग्रेजी नाम - लिनेसी फ्लैक्स सीडलिनसी फ्लैक्स सीड   संस्कृत नाम-- अलसी, नील पुष्प, उमा, अतसी,  हिंदी नाम - अलसी, तीसी अलसी का स्वरूप -  इसका पौधा 2-4 फुट ऊंचा सीधा व कोमल होता है। flax seed farming in India पत्र रेखा कर भला कर नौकरी वा फलक तीन शहरों से युक्त होता है। फूल सुन्दर आकाशीय रंग के फल...

organic-farming-history/जैविक खेती का इतिहास

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  Organic farming history/जैविक खेती का इतिहास जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कहा कि जैविक खेती प्राकृतिक की खेती के श्रेणी में आता है जहाँ सबकुछ आसानी से मिल जाता है।उन्होंने कहा कि जैविक खेती को आधार बनाकर युवा अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते है।क्योंकि रसायनिक खेती प्रभाव से उतपन्न समस्या के समाधान के लिए लोग जैविक खेती की ओर उम्मीद भरी निगाह से देख रहे है organic farming history जिसका नतीजा है कि आनेवाले दिनों जैविक खेती में स्वरोजगार की सम्भावना दिखाई दे रहा है।जिसमे जैविक खाद:ऐसे खाद जिसमे सुक्ष्मजीवों का एक बहुत बड़ा योग्दान रहता है, प्राकृति के अंदर कई प्रकार के अवशिष्ट पदार्थ होते है।जिसमे घर के अवशिष्ट पदार्थ और पशु से जो अवशिष्ट पदार्थ निकले अपशिष्ट शामिल है। जैविक खेती पर निर्भर Dependent on organic farming जैविक खेती की जड़ें organic farming history मानव कृषि इतिहास की मिट्टी में गहराई से जांच करती हैं। हम अपने पूर्वजों के शिकार और सभा से स्थानांतरित करने के बाद प्राकृतिक संसाधनों और पारिस्थितिक प्रक्रियाओं पर 99% समय से निर्भर हैं और कुछ 10,000 साल पहले पौधों और...

Land-preparation-in-organic-farming / Organic Farming Me Jameen Kee Taiyari

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    आर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत करने से पहले निम्नलिखित कार्य भूमि सुधार के लिए करना जरुरी है जिसकी जानकारी  1. जमीन की परीक्षण  सबसे पहले , Organic Farming Me Jameen Kee Taiyari जमीन की गुणवत्ता और पोषण स्तर की जांच करें। जमीन की संरचना , पीएच और वाटर रिटेंशन , उपादानों और कीटनाशकों के स्तर का मूल्यांकन करें। 2. कंपोस्ट या गोबर की जोड़ :   यदि जमीन का पोषण स्तर कम है , तो आपको कंपोस्ट या गोबर (खाद) की जोड़ करनी चाहिए। यह सूपवस्त्रों को टिकाए रखने में मदद करेगा और उपादानों को बढ़ाएगा। 3. जमीन में पर्याप्त पानी की व्यवस्था : जमीन को आराम से सिंचाई के लिए तैयार करें। जल संचयन और बौछार आदि का उपयोग करके पानी की बचत के लिए उपाय चिंतन करें। 4 . जड़ों और रिसायकलिंग  Organic Farming Me Jameen Kee Taiyari  को उचित समर्थन प्रदान करने के लिए बारीकी से जड़ों को हटाएं और कम्पोस्ट में परिवर्तित करें। 5 . कीटनाशकों की रोकथाम    ऑर्गेनिक फार्मिंग में कीटनाशकों का उपयोग प्रतिबंधित होता है। इसलिए , प्राकृतिक तरीकों से कीटों और रोगों को नियंत्रित करने का ...

Crop-diversity-in-organic-farming/ जैविक खेती में फसल विविधिता

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  फसल विविधिता की आवश्यकता  need for crop diversification Google photo मौजूदा वक्त में ज्यादातर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए पारंपरिक फसलों की खेती के दौरान अत्यधिक मात्रा में बीज, खाद, कीटनाशक, खरपतवारनाशक और फफूंदनाशी का प्रयोग कर रहे हैं. इससे कीट और खरपतवार में धीरे-धीरे उनके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती जा रही है. इससे फसलों के उपज पर भी प्रभाव पड़ रहा है. इसके अलावा अंधाधुंध उर्वरकों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जल एवं वातावरण पर भी प्रभाव पड़ रहा है. साथ ही किसानों की कृषि लागत भी बढ़ रही है. ऐसे में इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए Crop diversity in organic farming फसल विविधिकरण की आवश्यकता है. फसल विविधिकरण के माध्यम से इन सारी समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.  फसल विविधीता को बढ़ावा promote crop diversification केंद्र सरकार के अलावा कई राज्य सरकारें देश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही हैं. वहीं फसल विविधीकरण के जरिए इसके लिए जमीन तैयार की जा रही है. सरकार की यह कोशिश है कि देश के कि...