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  चिया सीड्स की खेती परिचय  Chia seeds cultivation introduction चिया के बीजो में ओमेगा फैटी एसिड की भरपूर मात्रा पाया जाता है | इसके अलावा चिया में फाइबर, कैल्शियम, प्रोटीन और अनेक मिनरल्स जैसे पोषक तत्व मौजूद होते है | जिस वजह से चिया का सेवन शरीर व दिल को बीमारियों से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करता है | स्वास्थ के लिए अधिक लाभकारी होने के चलते है, विदेशो में इसे सुपर फ़ूड भी कहते है | यदि आप भी चिया की खेती करने का मन बना रहे है, तो इस लेख में आपको चिया की खेती कैसे करे  की जानकारी दे रहे है | google photo चिया सीड्स की खेती / Chia Seeds Farming   चिया सीड्स खेती बढ़िया मुनाफा कमाने का वेहतर विकल्प है. क्योकि वर्तमान समय में चिया सीड्स की डिमांड बहुत अधिक है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इसकी फसल पर लागत का दोगुना अधिक दाम मिल जाते है. इसलिए चिया सीड्स की खेती किसानो के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. organic chia Farming in india भारत में चिया की उन्नत खेती  मध्य प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और हरियाणा में व्यापक पैमाने पर हो रही है. च...

Foxtail-millet-farming/cangni-ki-javik-kheti

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कंगनी की खेती Foxtail millet farming    कंगनी  एक मोटा अनाज  है जो दूसरी सबसे अधिक बोई जाने वाली फसलों में से एक है। Foxtail millet farming यह एकवर्षीय पौधा होता है जिसका ऊँचाई 4 से 7 फीट तक होती है। इसके बीज बहुत छोटे होते हैं जिनका आकार लगभग 2 मिलीमीटर होता है और इनका रंग किरकिरा में भिन होता है। इन बीजों का छिलका पतला होता है जो आसानी से हट जाता है। भारत में, कंगनी आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कुछ हद तक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में उगाया जाता है। इससे रोटी, खीर, चावल, इडली, दलिया, मिठाई और बिस्किट जैसे कई पकवान बनाए जाते हैं। google photo कंगनी की खेती  में जलवायु एवं मिट्टी  Climate and soil in Kangni cultivation जलवायु एवं मिट्टी  कंगनी की फसल Foxtail millet farming अच्छी जल निकास वाली सभी तरह भूमि में ली जा सकती है परंतु हल्की एवं दोमट मिट्टी इसके लिए सर्वोत्तम है इसके लिए अधिक उपज भूमि की आवश्यकता नहीं होती बाजरे की खेती गर्म जलवायु तथा कम वर्षा वाले क्षेत्र में की जा सकती ...

pearl-millet-farming/bajra-ki-kheti

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      pearl millet farming/bajra ki kheti   बाजरा की जैविक खेती    Google Image बाजरा की जैविक खेती का परिचय बाजरा दुनिया में व्यापक तौर पर उगाया जाता है यह फसल सूखे को सहन नहीं कर सकती इसलिए ऐसे क्षेत्र में जहां थोड़ी बारिश होती हो वहां स्पेशल की खेती हो सकती है  pearl millet farming  भारत बाजरे का सबसे बड़ा उत्पादक है यह चारे के लिए प्रयोग किया जाता है इसके तने का प्रयोग जानवरों के चारे के रूप में किया जाता है भारत में बाजरे का उत्पादन करने वाले क्षेत्र पंजाब राजस्थान महाराष्ट्र गुजरात उत्तर प्रदेश हरियाणा मध्य प्रदेश कर्नाटक आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु बाजरा मोटेअनाजों में एक मुख्य फसल है भारत दुनिया का घनी बाजरा उत्पादक देश है यह मुख्यतः खरीफ फसल में उगाया जाता है बाजरे का इतिहास प्रोसो बाजरा (पेनीकम मिलिया सिम) एक प्रकार का बाजरा है जो अपने अनाज के लिए उगाया जाता है और दुनिया के कुछ हिस्सों में यह मुख्य भोजन है यह यूरेशिया का मूल निवासी है और चीन भारत और पूर्वी यूरोप में इसकी खेती का एक लंबा इतिहास है यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन मुक्त भी है जो इ...

Proso-Millet-Farming-in-India

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Proso-Millet-Farming-in-India   Organic proso millet farming  In this article, information is given about the methods of cultivation of Proso Millet (Chenna or Bari), the benefits of its cultivation and its health benefits. Proso millet is a warm-season crop grown throughout . Proso Millet Farming in-India It is also called Chena or Bari. It is a nutritious grain that can tolerate drought conditions with less water requirement. Well-drained, loamy, or sandy loam soil is best suited for the cultivation of Proso Millet. Land Preparation: For the cultivation of Proso Millet, it is necessary to prepare the soil well. Plow two to three times and at the time of last ploughing, cow dung or compost at the rate of 20-25 tonnes per hectare should be mixed well. Sowing of seeds: Sow proso millet seeds at a depth of 2.5 to 3 cm. The sowing distance should be between 20 to 25 cm. After sowing, lightly irrigate the seeds. Irrigation: Proso millet crop requires less water to grow well. Howev...

jowar-farming

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  ज्वार की खेती (jowar farming)  ज्वार उत्तरी अफ्रीका और मिसरी सुदनीस सरहद पर 5000-8000 वर्ष पहले की जमपल फसल है। यह भारत के अनाजों में तीसरी महत्तवपूर्ण फसल है। यह फसल चारे के लिए और कईं फैक्टरियों में कच्चे माल में प्रयोग की जाती है। यू एस ए और अन्य कईं देशों में इसका प्रयोग होता है। यू एस ए ज्वार की पैदावार में सबसे आगे है। भारत में महांराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात, तामिलनाडू, राज्यस्थान और उत्तर प्रदेश इस फसल के मुख्य प्रांत हैं। यह खरीफ ऋतु की चारे की मुख्य फसल है।             google photo मध्य प्रदेश में ज्वार की खेती (jowar farming in mp) ज्वार विश्व की एक मोटे अनाज वाली महत्वपूर्ण फसल है। वर्षा आधारित कृषि के लिये ज्वार सबसे उपयुक्त फसल है । ज्वार की फसल से दोहरा लाभ मानव आहार के लिये अनाज के साथ ही साथ पशु आहार के लिये कडबी भी मिलती है। ज्वार की फसल कम वर्षा (450-500)में भी अच्छी उपज दे सकती है । एक ओर जहां ज्वार सूखे का सक्षमता से सामना कर सकती है । वहाँ कुछ समय के लिये भूमि में जलमग्नता भी सहन कर सकती है । ज्वार का पौधा अन्य अनाज वाली ...

10-Best-organic-food-brands-in-India

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10-Best-organic-food-brands-in-India Branded organic food companies' Information in this blog post  Top 10 organic companies in India In this article, information will be given about the 10 Best organic food brands in India so that consumers and businessmen can get information about the company. This article is being written to take advantage of this to save your health and money and also get pure organic food. To get food, in this article information is given about the production and production of companies. Take advantage of this information.  10 Best organic food brands in India  01    24 Mantra organic       02 -organic India       03 organic tattva       04 -Phalada is Pure and sure      05 Natureland organic      06  Nutriorg      07   Adya organic      08  PRAKRTIK STVA      09  win green farms     ...

muli-ki-kheti-jankari /radish-farming

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 परिचय कृषि क्षेत्र में मूली की जैविक खेती करके किस अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं इसकी खेती की जानकारी इस लेख में दी जा रही है muli ki kheti jankari मूली की खेती में जमीन की तैयारी बनी का समय खाद एवं उर्वरक की मात्रा खरपतवार नियंत्रण सिंचाई कटाई से संपूर्ण जानकारी दी जा रही है किसान भाई इस लेख का फायदा लेकर मूली की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं जमीन की तैयारी मूली की जैविक खेती में जमीन को पिलाओ द्वारा या तोता हाल द्वारा गहरी जुताई करके जमीन को समतल कर लेना चाहिए एवं इसकी बुवाई के लिए जमीन में महल पद्धति से बनी करना चाहिए बिजाई जैविक मूल्य की खेती के लिए बोनी के लिए सही समय बरसात एवं ठंड के दिनों में और गर्मियों में अप्रैल माह में इसकी बनी की जा सकती है muli ki kheti jankari अगस्त सितंबर में की जाने वाली बनी से अच्छा फायदा किसानों को मिलता है मूली की जैविक खेती के लिए मेड पद्धति से बीच की बिजाई करना चाहिए जिसमे बीज से बीच की दूरी 4 सेमी एवं महल से महल की दूरी ढाई फीट रखना चाहिए  सिंचाई मूली की खेती के लिए 7 से 10 दिन के भीतर स्प्रिक कलर द्वाचाई की जाना चाहिए हल्की सिंचाई करन...

organic-barnyard-millet-farming

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  organic Barnyard Millet (Kudirewali) farming  Barnyard millet is a drought-tolerant crop and hence it is grown as a rainfed crop. It can be grown successfully in partially waterlogged conditions. It is grown up to a height of 2,000 meters above sea level. A warm and moderately humid climate is good for growing "Barnyard Millet" . It is a hardy crop and is able to withstand adverse weather conditions better than other cereals. Google photo Soil preparation   "Barnyard Millet" is generally cultivated in soils of marginal fertility. It can be grown partially in water. This crop gives the best yield on sandy loam to loamy soil having an adequate amount of organic matter. Soil with low fertility and rocky soil are not suitable for growing the crop. organic Barnyard Millet field preparation The field has to be prepared before sowing the crop. For the preparation of the field, two plows with local plows or harrowing is sufficient. Sowing of this crop is done only with t...

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    organic Browntop millet (Chhoti Kangni): farming  . Know the method of cultivation and its healthy benefits Chhoti Kangni, also known as Kharpad, is a nutrient-rich crop that is extremely healthy.0rganic - browntop-millet-farming In this article, we will learn about the cultivation of Choti Kangni, its health benefits and other uses. Browntop millet is known by various names in India, such as “Choti Kangni” (Choti Kangni) in Hindi, and Kharpad. Its scientific name is Brachiaria ramosa and it is also known by names like Palapul, Korale, Andakorra in states like Tamil Nadu, Andhra Pradesh, and Karnataka. Choti Kangni or Korle is a warm-season crop widely grown in India0rganic-browntop-millet-farming. It is a multi-purpose crop used as grain, fodder, soil erosion control, and wildlife attraction. Choti Kangni is a nutrient-rich crop that is a good source of calcium, phosphorus, and magnesium. It is also gluten-free, making it a good option for those who are gluten int...

Arhar-ki-javik-kheti

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  अरहर की खेती का परिचय इस लेख में हम Arhar-ki-javik-kheti अरहर की खेती के विषय में संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं तुवर एक दलहनी प्रमुख फसल है यह खरीफ मौसम में उगाई जाने वाली फसल है इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होने से भोजन की थाली का महत्वपूर्ण स्थान है तुवर दाल की बाजार में अधिक मांग होने से महत्व बढ़ जाता है इसकी जैविक खेती के विषय में हम आपके संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं जिसका उपयोग करके आप एक नगद फसल के रूप में उगा सकते हैं अरहर की खेती में भूमि की तैयारी गर्मियों में जमीन की पलाऊ द्वारा गहरी जुताई करके रोटरी द्वारा जमीन को जमीन को घर-गोरी बना ली जाती है जुदाई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद का  पर्याप्त मात्रा जमीन में मिला देना चाहिए अरहर  की उन्नतशील किस्म RVICPH 2671: ये पहली सीएमएस आधारित भूरी अरहर की शंकर किस्म है। इसकी फसल अवधि 164 से 184 दिनों की होती है , इस किस्म की दाल में प्रोटीन की मात्रा 24.7 % होती है, इसकी औसत उपज 22 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती हैं।   पूसा 9: इस किस्म की अवधि 260 से 270 दिनों की होती हैं, जिसकी बुआई जुलाई से सिंतम्बर तक की जाती...

maize-farming/makka-ki-kheti

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makka ki  kheti   Makka ki kheti   makka ke keti   khareef ravi jayad  sabhi mosam me ki ja sakti hai parntu agar tapman28 digree ke aaspas rhta hai to utpadan achha hota hai makka ki khetime sabse pahle jameen me gahri jutai ki jati hai 2 trali gobar ki kad pirti akar dal kar mitti ko samtal kar liya jata hai maize-farming   iskebad makka se bamfar utpadan liya jaskta hai bhart me iski kheti bade bhubhag me ki jati hai makka beej avm unka upyog - makka ki upyog ke hisab se nimnlikhit kisme boi jati hai ( 1) Sweet corn   kisme joki bhutta bajar ke liye-Pusa supar sweet-1 phusa supar sweet-2 pusa vivek qpm.9 ( 2) popcorn   kisme jo lai ke upyog bali kisme..shaleemar popcorn .1 javahar popcorn.11,pral popcorn, BL empayr, CVL AMBER popcorn   (3) baby corn kisme -vivek hibrad.27,HM.4, VL baby corn 1,COBC 1 makka ki boni kon se mahine me ki jati he Makka ki  kheti/ corn maize farming  varas me har seejan me kijaskti he lekin eski ...

15-plants-to-grow-in-small-spaces

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15-plants-to-grow-in-small-spaces इनडोर,गार्डन 15 पौधे फायदेमंद आज हम शहरी खेती के अंतर्गत आपको कम जगह है मैं अधिक पौधे लगाने की बात करेंगे जिसके अंतर्गत15 पौधों को लगाने की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं सभी 15-plants-to-grow-in-small-spaces ऑर्गेनिक फार्मिंग करने बालों को यह जानकारी बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाली यीशु आखिरी तक पढ़ें बगीचे में पौधे उगाना, चाहे वह पारंपरिक आउटडोर गार्डन हो या एक फायदेमंद और आनंददायक अनुभव हो सकता है। पौधों का चुनाव आपके स्थान, जलवायु, उपलब्ध स्थान और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। यहां 15 पौधे हैं जिन्हें आप अपने बगीचे में उगाने पर विचार कर सकते हैं: टमाटर:  टमाटर कई बगीचों के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है। वे विभिन्न आकारों और रंगों में आते हैं, और उन्हें उगाना अपेक्षाकृत आसान है। तुलसी:  यह सुगंधित जड़ी बूटी पाक प्रयोजनों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है और इसे घर के अंदर और बाहर दोनों जगह उगाया जा सकता है। लैवेंडर:  लैवेंडर अपने खूबसूरत बैंगनी फूलों और सुखदायक खुशबू के लिए जाना जाता है। परागणकों को आकर्षित करने के लिए...

Organic-Celery-ayurvedic- uses-benefits-Effects /Ayurveda me Ajmoda ke fayde our nuksan

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Organic-Celery-ayurvedic- uses-benefits-Effects  आयुर्वेद में अजमोद के फायदे एवं नुकसान   जैविक अजमोद  (Celery Seeds ) -   Ayurveda me Ajmoda ke fayde our nuksan  भारतवर्ष में सर्वत्र विशेषकर बंगाल में शीत ऋतु में आरंभ में बोई जाती है हिमालय में उत्तरी और पश्चिमी प्रदेश में पंजाब की पहाड़ियों पर पश्चिमी भारत वर्ष और फसल में बहुलता से होता है फरवरी-मार्च में पुष्प खिलते हैं और मार्च-अप्रैल तक पुष्प फल में परिवर्तित होने पर पौधा समाप्त हो जाता है अजमोद के छोटे-छोटे चुप्त अजमान की भांति एक 3 फुट ऊंचे पत्ते विभक्त और किनारे कटे हुए होते हैं पोस्ट छतरी नोमा पुष्प क्रम में नन्हें-नन्हें श्वेत रंग के होते हैं जो पककर अनंत बीजों में परिवर्तित हो जाते हैं धनिया अजवाइन की भांति इस बीजों को भी अजमोद कहते हैं रासायनिक संगठन Chemical organization अजमोद में कपूर से मिलता-जुलता एक पदार्थ यदि एपी ओला के तैलीय तक्षण होता है इसके अतिरिक्त गंधक उड़न सिल एल्बुमिन लो अब गोंद छार और कुछ लवण पाए जाते हैं  गुणधर्म Properties - यह कब है बात नाशक वेदना स्थापक  वातानुलोमन विदाही...

Herb-garden-Basil-plant-care

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Herb-garden-Basil-plant-care Basil-plant-care Read this article on how to plant herbs on a rooftop If you have a rooftop large enough to plant an urban garden, you should reconsider. Many people do not know how to have an urban garden on a rooftop and they think that it is a very complicated thing. However, if you know the guidelines to do it well, it is quite simple. Google photo Medicinal Properties: Basil has been traditionally used in various natural remedies due to its potential medicinal properties. It contains essential oils such as eugenol, which exhibit antimicrobial and anti-inflammatory properties. Basil also contains antioxidants that may help protect against oxidative stress and support overall health. Some studies suggest that basil may provide digestive benefits and aid in stress management.   Basil plant Culinary Uses: Basil is a staple in many cuisines around the world , Herb garden Basil plant care  especially Italian and Thai cuisine. Its leaves have a disti...

Bottle-gourd-farming/lauki-ki-kheti

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 lauki ki kheti लौकी की खेती कई किसान एक साल में तीन-तीन लौकी की फसल ले लेते हैं और अच्छा मुनाफा भी कमाते हैं तो  क्योंकि लौकी को साल में तीन बार लगाया जा सकता है तो सबसे ज्यादा मुनाफा या उत्पादन लेना है तो वह सही समय कौन सा है और ज्यादा मुनाफा भी किसान भाइयों को लेकिन उसे टाइम जो है आपकी फसल का उत्पादन जून जुलाई की फसल की तुलना में काम रहता है   लौकी बोनी की विधियां  lauki ki kheti kaise kare अब बात करते हैं लौकी को लगाने का तरीका से लगाया जाता है एक तो पारंपरिक तरीका जिसमें जो बी है वह सड़क दिया जाता है या एक दीवार की तरह और तीसरा  मचान विधि से लौकी लगाई जाती है उसमें ज्यादा उत्पादन भी होता है और अच्छा भाव भी मिलता है अच्छा भाव भी लेना चाहते हैं तो मचान विधि का अपने खेत में लगाकर लोग लगा सकते हैं  1 एकड़ मचान विधि से लौकी लगाने में लगभग 35000 से ₹40000 का खर्च आता है और जो यह आगे बात करते हैं लौकी को लगाने में क्या सावधानियां बरतनी है तो सबसे पहले आप सीड ट्रीटमेंट जरूर करें ताकि किट वगैरा है आपके बीच को खराब ना करें नंबर दो पर पौधे से पौधे की दूरी है वह ड...

Brinjal-cultivation-in-Hindi/began-ki-kheti

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 Brinjal-cultivation-in-Hindi बैगन की खेती  बैगन की ऐसी सब्जी है इसकी खेती 12 महीने मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश बिहार छत्तीसगढ़ गुजरात राजस्थान काफी इलाकों पर 12 महीने बैगन की खेती की जाती ब्रिंजल अगस्त का जो महीने रहता है यह काफी व्यस्त माना जाता है और सर्दियों के लिए आपको सितंबर अंत से लेकर के अक्टूबर के बीच में आपको प्लांटेशन कर देना चाहिए और गर्मियों के लिए बैगन काफी लंबे समय तक चलने वाली क्रॉप है  बैगन की खेती में भूमि  दोस्तों भूमि मिट्टी किस प्रकार की मिट्टी होनी चाहिए तो 2 मिट भूमि पर भी अच्छा उत्पादन है और हल्की भूमि रेतीली 2 मिट भूमि है तो दोनों प्रकार की सॉइल पर पीएच वैल्यू है दोस्तों वह 7:30 से ऊपर की नहीं होनी चाहिए अधिक से अधिक पीएच मान लीजिए यदि पीएच की वैल्यू 8 से अधिक अल्कलाइन सॉइल है तो फिर ऐसी कंडीशन पर आप 50 किलोग्राम जिप्सम खेत की तैयारी करते समय प्रयोग कर लेना और यदि पीएच वैल्यू 8 से अधिक है तो आपको पता है कि यूरिया खाद देने के बाद भी रिजल्ट नहीं आते हैं तो इसलिए दोस्तों थोड़ा सा पीएच का ध्यान दे देना और मिट्टी की जांच जरुर कर लेना  पता चल जाए...